skip to main
|
skip to sidebar
a city of joy and prosperity
Sunday, July 20, 2008
a city of joy and prosperity
ये शहर सिर्फ़ बिहार का एक शहर नहीं बल्कि सपनो को पुरा करने का एक जरिया है
हम यहाँ पैदा हुए यह हमारी खुसकिस्मती है
इस शहर ने हमें क्या कुछ नहीं दिया
बड़ी तमन्ना है की हम भी शहर को कुछ दें
0 comments:
Post a Comment
Newer Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Blog Archive
►
2009
(1)
►
02/08 - 02/15
(1)
ह·ी·त देख·र बनाएं रिटायरमेंट होम ·ी योजना
▼
2008
(42)
►
11/16 - 11/23
(1)
राम कहो आडवानी जी
►
10/26 - 11/02
(14)
क्या एसा संभव है ?
क्या आपने देखा है एसा रिज्यूमे
सेब खाएं लेकिन सावधानी से
गुड वन यू शुड मस्ट रीड
मित्रों के लिए समय निकालिए
अपने कर्मियों से नारायण मूर्ति का संबोधन
एक बार मुस्कुरा दो
जोक शोक पढ़ते रहिये, जाही विधि रखे राम
देखिये कितना अन्तर है मर्द और औरत में
कुछ शायरी वायरी हो जाए
आप केंसर के बारे में कितना जानते हैं
एसा भी होता है
एक बार मुस्कुरा दो
जुल्म नहीं सहेंगे
►
10/05 - 10/12
(1)
अब जापान की बारी
►
09/28 - 10/05
(1)
अमेरिकी मंदी और घरेलु आईटी कंपनियां
►
09/07 - 09/14
(1)
बहुत मुश्किल नहीं है बाज़ार से पैसा कमाना
►
08/31 - 09/07
(1)
दिल के अरमान आंसुओं में बह गए
►
08/24 - 08/31
(3)
एक और गौतम को मिलेगा मौका
कोई कहे कहता रहे कितना भी हमको दीवाना
फ़िर मौका मिला उप्द्रविओं को
►
08/17 - 08/24
(4)
चरेवेति चरेवेति
पत्रकारों की फौज करेगी मौज
प्रचंड के हाथ में नेपाल
जम्मू में बवाल
►
08/10 - 08/17
(4)
भगवन मालिक
कि पैसा बोलता है
parmanu urja का virodh और देश की haaalat
बाबुओं की आज़ादी देश की बर्बादी
►
08/03 - 08/10
(6)
सिर्फ़ चेहरे नहीं फितरत भी बदलनी चाहिए
बहुत गड़बड़झाला है भाई
सिर्फ़ लूट ही नहीं है भाई
बदल रहा है हमारा बिहार
क्या इन्हें शर्म नहीं आती
सपने पुरे हो रहे hain
▼
07/20 - 07/27
(6)
कितना व्यावहारिक है ज़माना
कितना व्यावहारिक है ज़माना
कुछ काम की बातें
बहुत कुछ है दिल में पर कहने में झिझक होती है
सिर्फ गाली ना दीजिये कुछ कीजिये जनाब
a city of joy and prosperity
About Me
amit tyagi
i m what i m
View my complete profile
0 comments:
Post a Comment