यह ठीक है कि कई लोगों को लगता है कि कई लोगों को लगता है कि नीतिश सरकार जानबूझ कर ऐसे काम कर रही है जिससे लूट की दुकान चलती रहे, पर इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता। हो सकता है ऐसा हो या नहीं हो, पर लोगों में जो रुझान है उससे लगता है कि वे अब काम करना चाहते हैं और मेहनत करके कमाने में लगे हैं।
लूट लालू के समय में भी थी, मिश्राजी के समय में भी और श्रीबाबू के समय भी थी, उसकी प्रकृति बदली, चेरे बदल गए और बदल गए लूटनेवाले। संतोष कि बात है कि लोगों में जागरूकता आयी है। मेरे लिए राहत की बात यही है।
Tuesday, August 5, 2008
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